मारहु धरहु जनि जाइ
मारहु धरहु जनि जाइ
छन्द ८, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ। दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज॥ ८ ॥
अर्थ
वे पूँछ उठाकर कटकटाते हुए पुकारने लगे, “मारो, पकड़ो, जाने न पावे।” उनके लंगूर दसों दिशाओं में शोभा दे रहे हैं और उनके बीच में कोसलराज श्रीरामजी हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द ८, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
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राम-रावण युद्ध, रावण वध