तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन

छन्द १, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही। जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही॥ प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी। रघुबीर एकहिं तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी॥ १ ॥

अर्थ

उनके बीच में कोसलराज का सुंदर श्याम शरीर ऐसी शोभा पा रहा है, मानो ऊँचे तमाल वृक्ष के लिये अनेक इन्द्रधनुषों की श्रेष्ठ बाड़ बनायी गयी हो। प्रभु को देखकर देवता हर्ष और विषादयुक्त हृदय से 'जय, जय, जय' ऐसा बोलने लगे। तब श्रीरघुवीर ने क्रोध करके एक ही बाण से निमेषमात्र में रावण की सारी माया हर ली।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द १, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध