मंदोदरी रुदन कर भारी
मंदोदरी रुदन कर भारी
चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी॥ नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा॥ ४ ॥
अर्थ
मन्दोदरी छाती पीट-पीटकर और बहुत प्रकार से पुकार-पुकारकर बड़ा भारी विलाप करने लगी। नगर के सब लोग शोक से व्याकुल हो गये। सभी रावण को नीच कहने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार