अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए
चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिंधु पहिं आए॥ सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं॥ ३ ॥
अर्थ
देवता और सिद्ध स्तुति करके चले गये, तब लक्ष्मणजी कृपासिंधु के पास आये। पुत्रवध का समाचार सुनते ही रावण मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार