डोली भूमि गिरत दसकंधर

चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर॥ धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई॥ ३ ॥

अर्थ

रावण के गिरते ही पृथ्वी हिल गयी। समुद्र, नदियाँ, दिशाओं के हाथी और पर्वत क्षुब्ध हो उठे। रावण के धड़ के दोनों टुकड़े फैलाकर भालू और वानरों के समुदाय को दबाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़ा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध