माल्यवंत अति जरठ निसाचर

चौपाई ३, दोहा ४८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर॥ बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन॥ ३ ॥

अर्थ

माल्यवंत [नाम का एक] अत्यन्त बूढ़ा राक्षस था। वह रावण की माता का पिता (अर्थात् उसका नाना) और श्रेष्ठ मन्त्री था। वह अत्यन्त पवित्र नीति के वचन बोला-हे तात! कुछ मेरी सीख भी सुनो--।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना