जब ते तुम्ह सीता हरि आनी

चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी॥ बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो॥ ४ ॥

अर्थ

जब से तुम सीता को हर लाये हो, तब से इतने अपशकुन हो रहे हैं कि जो वर्णन नहीं किये जा सकते। वेद-पुराणों ने जिन का यश गाया है, उन श्रीराम से विमुख होकर किसी ने सुख नहीं पाया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना