महिमा यह न जलधि कइ बरनी
महिमा यह न जलधि कइ बरनी
चौपाई ५, दोहा ३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी॥ ५ ॥
अर्थ
यह न तो समुद्र की महिमा वर्णन की गयी है, न पत्थरों का गुण है और न वानरों की ही कोई करामात है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना