बाँधा सेतु नील नल नागर

चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर॥ बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई॥ ४ ॥

अर्थ

चतुर नल और नील ने सेतु बाँधा। श्रीरामजी की कृपा से उनका यह यश उजागर हो गया। जो पत्थर डूबते हैं और दूसरों को डुबा देते हैं, वे ही जहाज के समान [स्वयं तैरनेवाले और दूसरों को पार ले जानेवाले] हो गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।

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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना