श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे
दोहा ३ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान। ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन॥ ३ ॥
अर्थ
श्रीरघुवीर के प्रताप से पत्थर भी समुद्र पर तैर गये। ऐसे श्रीरामजी को छोड़कर जो किसी दूसरे प्रभु को जाकर भजते हैं वे [निश्चय ही] मन्दबुद्धि हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का दोहा ३ है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना