मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल

चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल॥ सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु॥ ४ ॥

अर्थ

हनुमानजी ने उससे जल माँगा, तो उसने कमण्डलु दे दिया। हनुमानजी ने कहा--थोड़े जल से मैं तृप्त नहीं होने का। तब वह बोला--तालाब में स्नान करके तुरंत लौट आओ, तो मैं तुम्हें दीक्षा दूँ, जिससे तुम ज्ञान प्राप्त करो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान