सर पैठत कपि पद गहा मकरीं
सर पैठत कपि पद गहा मकरीं
दोहा ५७ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान। मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान॥ ५७ ॥
अर्थ
तालाब में प्रवेश करते ही एक मगरी ने आकुल होकर उसी समय हनुमानजी का पैर पकड़ लिया। हनुमानजी ने उसे मार डाला। तब वह दिव्य देह धारण करके विमान पर चढ़कर आकाश को चली।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ५७ है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।
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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान