लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु

सोरठा ५९ · लंकाकाण्ड

सोरठा पाठ

लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल। प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक॥ ५९ ॥

अर्थ

भरतजी ने वानर (हनुमानजी) को हृदय से लगा लिया, उनका शरीर पुलकित हो गया और नेत्रों में [आनन्द तथा प्रेम के आँसुओं का] जल भर आया। रघुकुलतिलक श्रीरामचन्द्रजी का स्मरण करके भरतजी के हृदय में प्रीति समाती न थी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद” प्रकरण का सोरठा ५९ है। इस प्रकरण में औषधि लेकर लौटते हनुमान पर भरत के बाण का प्रहार और उनके बीच भावपूर्ण मिलन-संवाद का वर्णन है।

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भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद