लंकेस अति बल गर्ब

छन्द ४, दोहा ११३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब॥ मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग॥ ४ ॥

अर्थ

लंकापति रावण को अपने बल का बहुत घमंड था। उसने देवता और गन्धर्व सभी को अपने वश में कर लिया था और वह मुनि, सिद्ध, मनुष्य, पक्षी और नाग आदि सभी के हठपूर्वक पीछे पड़ गया था।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द ४, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा