लंकाँ भयउ कोलाहल भारी
लंकाँ भयउ कोलाहल भारी
चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी॥ देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई॥ १ ॥
अर्थ
लंका में बड़ा भारी कोलाहल (कोहराम) मच गया। अत्यन्त अहंकारी रावण ने उसे सुनकर कहा-- वानरों की ढिठाई तो देखो! यह कहते हुए हँसकर उसने राक्षसों की सेना बुलायी।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ