जयति राम जय लछिमन जय कपीस

दोहा ३९ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव। गर्जहिं सिंहनाद कपि भालु महा बल सींव॥ ३९ ॥

अर्थ

महान् बल की सीमा वे वानर-भालू सिंह के समान ऊँचे स्वर से “श्रीरामजी की जय', “लक्ष्मणजी की जय', 'वानरराज सुग्रीव की जय' ऐसी गर्जना करने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद-राम-संवाद” प्रकरण का दोहा ३९ है। इस प्रकरण में अंगद के लौटने पर राम-मंत्रणा और लंका पर चतुर्दिक आक्रमण की रणनीति का वर्णन है।

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अंगद-राम-संवाद