लंका सिखर उपर आगारा

चौपाई ४, दोहा १० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा॥ बैठ जाइ तेहिं मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन॥ ४ ॥

अर्थ

लंका की चोटी पर एक अत्यन्त विचित्र महल था। वहाँ नाच-गान का अखाड़ा जमता था। रावण उस महल में जाकर बैठ गया। किन्नर उसके गुणसमूहों को गाने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को उपदेश