कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका

चौपाई ४, दोहा १०५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका॥ कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी॥ ४ ॥

अर्थ

प्रभु ने उनको कृपापूर्ण दृष्टि से देखा [और कहा--] सब शोक त्यागकर रावण की अन्त्येष्टि क्रिया करो। प्रभु की आज्ञा मानकर और हृदय में देश और काल का विचार करके विभीषणजी ने विधिपूर्वक सब क्रिया की।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।

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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि