बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा

चौपाई ३, दोहा १०५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा॥ लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो॥ ३ ॥

अर्थ

उन्होंने भाई की दशा देखकर दुःख किया। तब प्रभु श्रीरामजी ने छोटे भाई को आज्ञा दी [कि जाकर विभीषण को थैर्य बँधाओ]। लक्ष्मणजी ने उन्हें बहुत प्रकार से समझाया तब विभीषण प्रभु के पास लौट आये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।

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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि