कह सुग्रीव सुनहु रघुराई
कह सुग्रीव सुनहु रघुराई
चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कह सुग्रीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई॥ मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई॥ ३ ॥
अर्थ
सुग्रीव ने कहा- हे रघुनाथजी ! सुनिये। चन्द्रमा में पृथ्वी की छाया दिखाई दे रही है। किसी ने कहा--चन्द्रमा को राहु ने मारा था। वही [चोट का] काला दाग हृदय पर पड़ा हुआ है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।
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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय