कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी

चौपाई ५, दोहा ९८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी॥ पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे॥ ५ ॥

अर्थ

तब उसने क्रोध करके उछलकर दोनों को पकड़ लिया। पृथ्वी पर पटकते समय वे उसकी भुजाओं को मरोड़कर भाग छूटे। उसने क्रोध करके हाथों में दस धनुष लिये और वानरों को बाणों से मारकर घायल कर दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।

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घोर युद्ध, रावण की मूर्छा