हनुमदादि मुरुछित करि बंदर
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर
चौपाई ६, दोहा ९८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर॥ मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा॥ ६ ॥
अर्थ
हनुमानजी आदि सब वानरों को मूर्छित करके और संध्या का समय पाकर रावण हर्षित हुआ। समस्त वानर-वीरों को मूर्छित देखकर रणधीर जामवंत दौड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।
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घोर युद्ध, रावण की मूर्छा