कीन्हेहु प्रभु बिरोध तेहि देवक
कीन्हेहु प्रभु बिरोध तेहि देवक
चौपाई ३, दोहा ६३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कीन्हेहु प्रभु बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक॥ नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा॥ ३ ॥
अर्थ
हे स्वामी! तुमने उस परम देवता का विरोध किया, जिसके शिव, ब्रह्मा आदि देवता सेवक हैं। नारद मुनि ने मुझे जो ज्ञान कहा था, वह मैं तुझसे कहता; पर अब तो समय जाता रहा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।
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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश