अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई

चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सुफल करौं मैं जाई॥ स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन॥ ४ ॥

अर्थ

हे भाई! अब तो [अन्तिम बार] अँकवार भरकर मुझसे मिल ले। मैं जाकर अपने नेत्र सफल करूँ। तीनों तापों को छुड़ाने वाले श्यामशरीर, कमलनेत्र श्रीरामजी के जाकर दर्शन करूँ।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।

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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश