खल खंडन मंडन रम्य छमा
खल खंडन मंडन रम्य छमा
छन्द ११, दोहा १११ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा॥ नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेमु सदा सुभदं॥ ११ ॥
अर्थ
आप दुष्टों का खण्डन करनेवाले और पृथ्वी के रमणीय आभूषण हैं। आपके चरणकमल श्रीशिव-पार्वती द्वारा सेवित हैं। हे राजाओं के नायक! मुझे यह वरदान दीजिये कि आपके चरणकमलों में सदा मेरा कल्याणदायक [अनन्य] प्रेम हो।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द ११, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।
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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा