कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं

चौपाई ३, दोहा ४४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं॥ पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा॥ ३ ॥

अर्थ

वानरलीला करके (घुड़की देकर) दोनों उनको डराते हैं और श्रीरामचन्द्रजी का सुयश सुनाते हैं। फिर हाथों से सोने के खंभे पकड़कर उन्होंने [परस्पर] कहा कि अब उत्पात आरम्भ किया जाय।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
युद्धारम्भ