कलस सहित गहि भवनु ढहावा

चौपाई २, दोहा ४४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा॥ नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती॥ २ ॥

अर्थ

उन्होंने कलश सहित भवन को पकड़कर ढहा दिया। यह देखकर राक्षसराज रावण डर गया। नारियों के समूह छाती पीटने लगे [और कहने लगे--] अब दो उत्पाती वानर [एक साथ] आ गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

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युद्धारम्भ