कपि बल देखि सकल हियँ हारे
कपि बल देखि सकल हियँ हारे
चौपाई १, दोहा ३५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे॥ गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा॥ १ ॥
अर्थ
अंगद का बल देखकर सब हृदय में हार गये। तब अंगद के परचारे पर रावण स्वयं उठा। जब वह अंगद का चरण पकड़ने लगा, तब बालिकुमार अंगद ने कहा--मेरा पद पकड़ लेने से तेरा बचाव नहीं होगा!
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद