जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर
जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर
चौपाई १, दोहा ४४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर॥ रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहिं कोसलाधीस दोहाई॥ १ ॥
अर्थ
युद्ध में शत्रुओं के विरुद्ध दोनों वानर क्रुद्ध हो गये। हृदय में श्रीरामजी के प्रताप का स्मरण करके दोनों दौड़कर रावण के महल पर जा चढ़े और कोसलाधीश की दुहाई बोलने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ