काल बिबस पति कहा न माना

चौपाई ७, दोहा १०४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना॥ ७ ॥

अर्थ

हे पति! काल के पूर्ण वश में होने से तुमने [किसी का] कहना नहीं माना और चराचर के नाथ परमात्मा को मनुष्य करके जाना।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।

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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि