कहत बिभीषन सुनहु कृपाला

चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला॥ लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंधर देख अखारा॥ २ ॥

अर्थ

विभीषण बोले--हे कृपालु ! सुनिये, यह न तो बिजली है, न बादलों की घटा। लंका की चोटी पर एक महल है। दशग्रीव रावण वहाँ [नाच-गान का] अखाड़ा देख रहा है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के बाण से रावण के मुकुट और छत्र के गिरने तथा उसके अभिमान के भंग होने का वर्णन है।

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राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना