छत्र मेघडंबर सिर धारी

चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी॥ मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका॥ ३ ॥

अर्थ

रावण ने सिर पर मेघडंबर (बादलों के डंबर-जैसा विशाल और काला) छत्र धारण कर रखा है। वही मानो बादलों की अत्यन्त काली घटा है। मन्दोदरी के कानों में जो कर्णफूल हिल रहे हैं, हे प्रभो ! वही मानो बिजली चमक रही है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के बाण से रावण के मुकुट और छत्र के गिरने तथा उसके अभिमान के भंग होने का वर्णन है।

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राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना