देखु बिभीषन दच्छिन आसा

चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घमंड दामिनी बिलासा॥ मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा॥ १ ॥

अर्थ

हे विभीषण ! दक्षिण दिशा की ओर देखो, बादल कैसा घुमड़ रहा है और बिजली चमक रही है। भयानक बादल मीठे-मीठे (हलके-हलके) स्वर से गरज रहा है। कहीं कठोर ओलों की वर्षा न हो !

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के बाण से रावण के मुकुट और छत्र के गिरने तथा उसके अभिमान के भंग होने का वर्णन है।

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राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना