भागत भट पटकहिं धरि धरनी
भागत भट पटकहिं धरि धरनी
चौपाई ४, दोहा ४७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भागत भट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी॥ गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
भागते हुए राक्षस योद्धाओं को वानर और भालू पकड़कर पृथ्वी पर दे मारते हैं। और अद्भुत करनी करते हैं (युद्धकौशल दिखलाते हैं)। पैर पकड़कर उन्हें समुद्र में डाल देते हैं। वहाँ मगर, साँप और मछलियाँ पकड़-पकड़कर खा डालती हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
युद्धारम्भ