काल दंड गहि काहु न मारा

चौपाई ४, दोहा ३७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा॥ निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं॥ ४ ॥

अर्थ

काल दण्ड लेकर किसी को नहीं मारता। वह धर्म, बल, बुद्धि और विचार को हर लेता है। हे स्वामी! जिसका काल निकट आ जाता है, उसे आप ही की तरह भ्रम हो जाता है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना