दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ

दोहा ३७ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु। कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु॥ ३७ ॥

अर्थ

आपके दो पुत्र मारे गए और नगर जल गया। अब भी हे प्रियतम! इस भूल की पूर्ति कर दीजिए, और हे नाथ! कृपासिंधु श्रीरघुनाथजी को भजकर निर्मल यश लीजिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का दोहा ३७ है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना