जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि
जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि
दोहा ३१ (ख) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक। खाहिं निसाचरदिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक॥ ३१ (ख) ॥
अर्थ
जिनके बल का तुझे गर्व है, ऐसे अनेकों मनुष्यों को तो राक्षस रात-दिन खा जाते हैं। अरे मूढ़! हठ छोड़कर समझ (विचार कर)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का दोहा ३१ (ख) है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद