जब तेहिं कीन्हि राम कै निंदा

चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जब तेहिं कीन्हि राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा॥ हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना॥ १ ॥

अर्थ

जब उसने श्रीरामजी की निन्दा की, तब तो कपिश्रेष्ठ अंगद अत्यन्त क्रोधित हुए। क्योंकि [शास्त्र ऐसा कहते हैं कि] जो अपने कानों से भगवान् विष्णु और शिव की निन्दा सुनता है, उसे गोवध के समान पाप होता है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद