जिमि अरुनोपल निकर निहारी
जिमि अरुनोपल निकर निहारी
चौपाई ५, दोहा ४० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी॥ चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा॥ ५ ॥
अर्थ
जैसे मूर्ख मांसाहारी पक्षी लाल पत्थरों का समूह देखकर उस पर टूट पड़ते हैं, [पत्थरों पर लगने से] चोंच टूटने का दुःख उन्हें नहीं सूझता, वैसे ही ये बेसमझ राक्षस दौड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ