जौं असि मति पितु खाए कीसा
जौं असि मति पितु खाए कीसा
चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा॥ पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही॥ ५ ॥
अर्थ
[रावण बोला--] अरे वानर! जब तेरी ऐसी बुद्धि है तभी तो तू बाप को खा गया। ऐसा वचन कहकर रावण हँसा। अंगद ने कहा--पिता को खाकर फिर तुमको भी खा डालता। परन्तु अभी तुरंत कुछ और ही बात मेरी समझ में आ गयी !
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद