बालि बिमल जस भाजन जानी
बालि बिमल जस भाजन जानी
चौपाई ६, दोहा २४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी॥ कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते॥ ६ ॥
अर्थ
अरे नीच अभिमानी! बाली के निर्मल यश का पात्र जानकर तुम्हें मैं नहीं मारता। रावण! यह तो बता कि जगत में कितने रावण हैं ? मैंने जितने रावण अपने कानों से सुन रखे हैं, उन्हें सुन--।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद