जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि

चौपाई ३, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि॥ सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना॥ ३ ॥

अर्थ

हे प्रभो! यदि वह सिद्ध हो पायेगा तो हे नाथ! फिर जल्दी जीता न जा सकेगा। यह सुनकर श्रीरघुपति ने बहुत सुख माना और अंगदादि अनेक वानरों से बोले।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना