इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा
चौपाई २, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा॥ मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन॥ २ ॥
अर्थ
यहाँ विभीषण ने मंत्र विचार किया [और श्रीरामचन्द्रजी से कहा--] हे अतुल बल वाले उदार नाथ! देवताओं को सताने वाला खल, मायावी मेघनाद अपावन यज्ञ कर रहा है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना