जामवंत बोले दोउ भाई
जामवंत बोले दोउ भाई
चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई॥ राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं॥ ३ ॥
अर्थ
जाम्बवान् ने नल-नील दोनों भाइयों को बुलाकर उन्हें सारी कथा कह सुनायी [और कहा--] मन में श्रीरामजी के प्रताप को स्मरण करके सेतु तैयार करो, [रामप्रताप से] कुछ भी परिश्रम नहीं होगा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना