बोलि लिए कपि निकर बहोरी

चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी॥ राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू॥ ४ ॥

अर्थ

फिर वानरों के समूह को बुला लिया [और कहा--] आप सब लोग मेरी कुछ विनती सुनिये। अपने हृदय में श्रीरामजी के चरण-कमलों को धारण कर लीजिये और सब भालू और वानर एक खेल कीजिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना