तव रिपु नारि रुदन जल धारा
तव रिपु नारि रुदन जल धारा
चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तव रिपु नारि रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा॥ सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी॥ २ ॥
अर्थ
परन्तु आपके शत्रुओं की स्त्रियों के आँसुओं की धार से यह फिर भर गया और उसी से खारा भी हो गया। हनुमानजी की यह अत्युक्ति सुनकर वानर श्रीरघुनाथजी की ओर देखकर हर्षित हो गये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना