जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर

चौपाई ४, दोहा ७३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर॥ मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला॥ ४ ॥

अर्थ

अब कहाँ जाय, यह सोचकर (रास्ता न पाकर) वानर व्याकुल हो गये। मानो पर्वत इन्द्र की कैद में पड़े हों। मेघनाद ने मारुतसुत हनुमान, अंगद, नल और नील आदि सभी बलवानों को व्याकुल कर दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना