पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन
चौपाई ५, दोहा ७३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन॥ पुनि रघुपति सैं जूझै लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा॥ ५ ॥
अर्थ
फिर उसने लक्ष्मणजी, सुग्रीव और विभीषण को बाणों से मारकर उनके शरीरों को चलनी कर दिया। फिर वह श्रीरघुनाथजी से लड़ने लगा। वह जो बाण छोड़ता है, वे साँप होकर लगते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना