जहँ जाहिं मर्कट भागि

छन्द ४, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि। भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु॥ ४ ॥

अर्थ

वानर भागकर जहाँ भी जाते हैं, वहीं आग जलती देखते हैं। वानर-भालू व्याकुल हो गये। फिर रावण बालू बरसाने लगा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द ४, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध