धरु मारु बोलहिं घोर
धरु मारु बोलहिं घोर
छन्द ३, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर। मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान॥ ३ ॥
अर्थ
वे “पकड़ो, मारो” आदि घोर शब्द बोल रही हैं। चारों ओर (सब दिशाओं में) यह ध्वनि भर गयी। वे मुख फैलाकर खाने दौड़ती हैं। तब वानर भागने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द ३, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
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राम-रावण युद्ध, रावण वध